टोंक डिपो बना रामभरोसे! सूरज ढलते ही थम जाते हैं उपखंडों के बस पहिए, आवारा मवेशियों के बीच रात गुजारने को मजबूर मुसाफिर

टोंक: जिला मुख्यालय का रोडवेज बस डिपो इन दिनों अपनी बदहाली और कुप्रबंधन के आंसू रो रहा है। टोंक रोडवेज डिपो की लापरवाही का खामियाजा रोज़ाना सैकड़ों ग्रामीण और नौकरीपेशा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। आलम यह है कि शाम के 7 बजते ही जिले के 5 प्रमुख उपखंड क्षेत्रों के लिए डिपो से एक भी बस उपलब्ध नहीं होती। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले मुसाफिरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
7 बजते ही कट जाता है 5 उपखंडों का संपर्क
यात्रियों की शिकायत है कि शाम 7 बजे के बाद टोंक जिला मुख्यालय से जिले के पांचों उपखंड क्षेत्रों के लिए रोडवेज बसों का संचालन पूरी तरह ठप हो जाता है। देर शाम काम खत्म करके घर लौटने वाले कर्मचारियों, मजदूरी करने वाले ग्रामीणों और इलाज के लिए जिला अस्पताल आने वाले मरीजों के तीमारदारों के पास अपने गांव लौटने का कोई साधन नहीं बचता। बसों के अभाव में यात्रियों को या तो भारी पैसे खर्च करके निजी वाहनों (प्राइवेट साधनों) का सहारा लेना पड़ता है या फिर पूरी रात बस स्टैंड पर ही काटनी पड़ती है।
यात्रियों की जगह लावारिस मवेशियों का कब्जा
एक तरफ जहां बसों के इंतजार में यात्री परेशान रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ टोंक डिपो परिसर आवारा और लावारिस पशुओं का चारागाह बन चुका है। बस स्टैंड के चप्पे-चप्पे पर आवारा मवेशी घूमते और बैठे नजर आते हैं। रात के समय यह समस्या और जानलेवा हो जाती है। परिसर में घूमते सांडों और गायों के कारण न सिर्फ दुर्घटना का डर बना रहता है, बल्कि गंदगी के चलते बदबू से यात्रियों का बैठना तक मुहाल हो जाता है।
प्रशासन और डिपो प्रबंधन मौन
स्थानीय नागरिकों और यात्रियों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार रोडवेज डिपो के उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन डिपो प्रबंधन इस बदहाली को सुधारने के मूड में नहीं दिख रहा है। रात के समय सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने और आवारा पशुओं के जमावड़े के कारण महिला यात्रियों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो रहा है। जनता अब जिला प्रशासन और परिवहन विभाग से इस रूट पर रात्रि कालीन बस सेवाएं बहाल करने और डिपो को मवेशी मुक्त बनाने की मांग कर रही है।
