राजस्थान के पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से की शिष्टाचार भेंट, कृषि शिक्षा व किसानों के हित में समन्वित कार्ययोजना पर चर्चा

जयपुर, 5 अगस्त। राज्य के पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राजभवन में राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ किसनराव बागड़े से शिष्टाचार भेंट की। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा तथा कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा से भी मुलाकात कर कृषि शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, तकनीकी हस्तांतरण और किसानों के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की।प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलगुरु एवं कुलगुरु समन्वय समिति के अध्यक्ष प्रो. डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने किया। उनके साथ स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलगुरु प्रो. डॉ. आर.बी. दूबे, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलगुरु प्रो. डॉ. प्रताप सिंह, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के कुलगुरु प्रो. डॉ. वी.एस. जैतावत तथा कृषि विश्वविद्यालय, कोटा की कुलगुरु प्रो. डॉ. विमला डुकवाल भी मौजूद रहीं।

राज्यपाल से हुई मुलाकात के दौरान कुलगुरुओं ने कृषि विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक उपलब्धियों, अनुसंधान गतिविधियों, कृषि प्रसार कार्यक्रमों तथा किसानों के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के अनुरूप कृषि तकनीकों के विकास, डिजिटल कृषि, आधुनिक अनुसंधान परियोजनाओं, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग, कृषि वैज्ञानिकों की उपलब्धियों तथा विद्यार्थियों के कौशल विकास कार्यक्रमों पर भी विस्तार से चर्चा की। साथ ही विश्वविद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय, प्रशासनिक प्रक्रियाओं में एकरूपता और कृषि शिक्षा को राष्ट्रीय एवं वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने के प्रयासों से भी अवगत कराया।
राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े ने कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि कृषि शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार का अंतिम उद्देश्य किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान को जनहित से जोड़ने, विद्यार्थियों में नवाचार और उत्कृष्टता की भावना विकसित करने तथा आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिक से अधिक किसानों तक प्रसार सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी कृषि विश्वविद्यालय मिलकर राजस्थान की कृषि को नई दिशा देने और किसानों की समृद्धि बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा से हुई मुलाकात में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, कृषि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, अनुसंधान को किसानों की जरूरतों से जोड़ने, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण तथा डिजिटल कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन और प्रिसीजन फार्मिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को विश्वविद्यालयों द्वारा विकसित उन्नत फसल किस्मों, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, मूल्य संवर्धन, कौशल विकास तथा किसानों तक नई तकनीकों के प्रभावी हस्तांतरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी।

मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों के कार्यों की सराहना करते हुए किसान-केंद्रित अनुसंधान, विश्वविद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीकों के प्रभावी विस्तार पर बल दिया। उन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और कृषि प्रसार गतिविधियों को राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया।कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा से हुई भेंट में कृषि अनुसंधान, कृषि प्रसार, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, बागवानी विकास, कृषि विविधीकरण तथा किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। कुलगुरुओं ने नई फसल किस्मों, जलवायु-स्मार्ट कृषि तकनीकों, बीज उत्पादन, कृषि यंत्रीकरण और कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय राज्य के कृषि विकास की आधारशिला हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों की जरूरतों के अनुरूप व्यवहारिक और उपयोगी तकनीकों का विकास करने तथा अनुसंधान का लाभ अंतिम किसान तक पहुंचाने के लिए कृषि प्रसार तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने का आह्वान किया।
